Wednesday, 24 May 2017

कवित्त    
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मां अम्बे तव बाट निहारू आये तेरे द्वार
मुर्ति मंजु मनभावन मुखचंद लागे
कनक किरीट मस्तक पे रूप मनोहर
एक सहारा तेरा द्वारा यहीं चित्त लागे
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मौलिक रचना ©= कवि हिमांशु पाण्डेय
7800342510

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