Monday, 19 June 2017

सरिता-सागर

.......सरिता-सागर........

सागर तुझमें एसा क्या है...?
सरिता तुझपे मरती है |
अपना सब कुछ बलिहारी कर,
आकर तुझसे मिलती है ||

प्रेम का कैसा बंधन है,
दोनों दिन रात तड़पते हैं |
अपना तन-मन अर्पण कर,
इक दूजे पर मरते हैं ||

सरिता अपने प्रियतम के,
बाहों में खो जाने को |
चलती रहती है प्रति पल,
निज अस्तित्व मिटाने को ||

पर्वत से चलकर खाड़ी में,
सरिता सागर मिलन हुआ |
मिलकर अपनी सरिता से,
सागर कितना मगन हुआ ||

    कवि हिमांशु पाण्डेय
      9415 580 588

Wednesday, 24 May 2017

कवित्त    
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मां अम्बे तव बाट निहारू आये तेरे द्वार
मुर्ति मंजु मनभावन मुखचंद लागे
कनक किरीट मस्तक पे रूप मनोहर
एक सहारा तेरा द्वारा यहीं चित्त लागे
…………………………………………………
मौलिक रचना ©= कवि हिमांशु पाण्डेय
7800342510
✍कवि हिमांशु पाण्डेय "प्रयागवासी" की कलम से पेश है कुछ गीत
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तेरी मुहब्बत की राहो में
भटक रहे दिवाने है
नजरे इनायत की चाहत में
रचते नए तराने है
👰🏻👰🏻👰🏼👸🏻👸🏼🙋🏻💃🏻💃🏻💁🏻
नकाब पहन के चलती हो
ना लगे नजर जमाने की
चर्चे होते गलियों मे अब
जुल्फ💇 तेरे लहराने की
💁🙇💏💏👩‍❤️‍💋‍👩👩‍👩‍👧‍👦👩‍👩‍👧👗👨‍
बना लिया  आशिक है सबको
गढ़ते सब अफसाने है
तेरी मुहब्बत की राहो में
भटक रहे दिवाने है
💅✌😴💤😴💤😴💤🤗
☎7800342510, 9415580588
✍Himanshu prayagwashi